पर्यावरण की रक्षा..

बाथ टब के बाद उसने शावर लिया,और अपनी AC कार से,वो शोशल वर्कशाप पे पहुँचा…गज़ब की ओज़ थी उसकी वाणी में..पर्यावरण पे क्या बोलता था वो,पानी बचाने से लेकर ,ओज़ोन पर्त तक…सब उसकी व्याख्यान जिंदा थे..उसने दो पेड़ भी लगाये,भाषण भी दिया,और घर जाकर फिरHot water टब में,उसने विश्राम किया…थक चुका था वो,समाज सेवा इतना […]

पर्यावरण की रक्षा..

अधूरी दास्तां…

एक पूरी ज़िंदगी मे,होते है कई अधूरे दास्ताँ,जैसे बूंद-बूंद से बनता है समंदर,जैसे राई-राई से बनता है पहाड़,वैसे ही कई अधूरी दास्तानों से मिलकर,बनती है इक पूरी ज़िंदगी,अधूरापन पूर्णता के मार्ग पर,एक पड़ाव मात्र है,और पड़ाव कभी गंतव्य नही होते,पर गंतव्य तक का सफर पड़ावों के बिना अधूरी दास्ताँ है।।

अधूरी दास्तां…

क्या लिखूँ बसंत मैं..

क्या लिखूँ बसंत मैं, पत्थरों के जंगलों में, वातानुकूलित कमरों में बैठा, क्या लिखूँ बसंत मैं…. ना पत्तों को झड़ते देखा, ना नवअंकुर लगते, क्या लिखूँ बसंत मैं… Photo by Pixabay on Pexels.com

क्या लिखूँ बसंत मैं..

शतरंज की बाज़ी…

ये किस उधेड़बुन में उलझा रही हो मुझे,कभी दो कदम आगे,तो कभी ढाई कदम पीछे,क्यो जीवन को ‘शतरंज की बाजी’बना रही हो तुम,चलो तुम जीती,मैं हार जाता हूँ,तुम अपनी जिद वही रखो,मैं अपना सर झुकाता हूँ,कभी तो हाथ मे मेरी, तुम अपना हाथ भी दे दो,कदम संग- संग बढ़ाओ,थोड़ी दूरी साथ तो दे दो…चलो कोई […]

शतरंज की बाज़ी…

🪔 शुभ दीपावली 🪔

आप सभी पाठकों एवं मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए, बधाई । 🎉। इस खुशी,हर्ष, उल्लास मे एक एक बात याद रखिएगा, खुशियां बांटने से बढ़ती है। इस नकारात्मक और कठिन समय मे बहुत से भाई बंधु शायद ही अपने परिवारों को आवश्यक वस्तुए उपलब्ध करा पाए, अपने आस पास नजर रखे और जितना हो […]

🪔 शुभ दीपावली 🪔

गलतफहमी…

कुछ करते रहने की इतनी बुरी आदत है मुझे,की कुछ भी करता रहता हूँ,कोई काम ना भी हो तो बिजी रहता हूँ,क्यो?क्योकि बिजी रहने की गलतफहमी है मुझे,मेरे क्रियाकलापों के हिसाब से अगर दिन रात,12 घंटे के भी होते तो कोई खास फर्क ना पड़ताकल ही मैं खुद से पूछ रहा था कि करता क्या […]

गलतफहमी…

वेटिंग रूम / Waiting Room

बेटी के ICU में होने की तकलीफ बहुत अंदर तक थी, मैं निराश भी था। पूरा दिन हॉस्पिटल के चक्कर लगाता रहा कागजी कार्यवाही, रजिस्ट्रेशन और कोविड। पिछले दिन मंगलवार का व्रत था उस दिन सुबह ही निकलना पड़ा तो दो दिन से भूखा था पर भूख महसूस नही हुई। आपकी क्षमता हमेशा बुरे समय […]

वेटिंग रूम / Waiting Room

संबल..

सम्बल का मतलब तब समझ आया,जब खुद को उसकी तलब लगी थी,बड़ी मुश्किल से मिला था,पर जब मिला तो,आंखों से मोती बन टपक पड़ा,अब मैं भी सम्बल बनूँगा,किसी अपने की,किसी अनजाने की,क्योकि अब मैं सम्बल का मतलब समझ गया हूँ।।

संबल..